Home

Meethi Baatein

Explanation of sakhi,doha and pod of bhaktikalin poet

Latest from the Blog

तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय

तन को जोगी सब करे,मन को विरला कोय सहजे सब बिधि पाइए,जो नाम जोगी होय लोग अपने तन को साफ़ रखने में जूते रहते हैं सुबह शाम अपने तन को साफ़ करने लिए नहाते हैं ।पूजा करनी हो या मंदिर जाना हो पहले नहा कर अपने तन को साफ़ कर लेते हैं पर अपने मनपढ़ना जारी रखें “तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय”

जग में बैरी कोई नहीं, ज मन शीतल हुए

जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होययह आपा तो डाल दे,दया करे सब कोय यह दुनिया वैसा हैं जैसा हम सोचते हैं जैसा हमारा बिचार होता हैं। अगर हमारा मन साफ़ हैं और हमारे मन में कोई खोट नहीं हैं तो कोई हमसे बैर नहीं रख सकता कोई हमारा बुरा नहीं चाह सकतापढ़ना जारी रखें “जग में बैरी कोई नहीं, ज मन शीतल हुए”

कागा का को धन हरे,कोयल का को देय

कागा का को धन हरे,कोयल का को देय मीठे वचन सुना के,जग अपना कर लेय जो दो मीठे बोल बलना जानता हैं पूरी दुनिया उसकी मुट्ठी में होता हैं। अपने हो या पराये सभी उनसे बातें करना पसंद करते हैं। अगर आप मीठी बातें बोलना जानते हैं तो आप कभी किसी मुस्किल में नहीं घिरपढ़ना जारी रखें “कागा का को धन हरे,कोयल का को देय”

Get new content delivered directly to your inbox.

Create your website at WordPress.com
प्रारंभ करें
%d bloggers like this: